Wednesday, February 2, 2011

Mera pahla PYAAR....................



मेरा पहला प्यार एक अनकही 

कविता कि तरह था जिसे मैंने अपने मस्तिस्क  सोच तो  था किन्तु किसी के समक्ष कभी बया नहीं किया था एक दिन  में सोच तो लिया था , किन्तु  किसी  के  समक्ष  कभी बया नहीं किया था एक दिन अचानक मेरी एक लड़की से हुयी, पहली मुलाकात में ही मुझे अजीब सी फीलिंग हुयी, जैसे मैं उसे बरसो से जनता हूँ या फिर मेरा उससे जन्मो का रिश्ता हो पर ऐसा कहा होता है यह सब सिर्फ किताबी बातें है उसका भोलापन और सादगी उसे अन्य लड़कियों से अलग दिखता था वह हमेशा मेरे सामने ही रहती थी उसका ज्यादा समय मेरे साथ ही गुज़रता था क्योंकि वास्तव में वह मेरी क्लासमेट थी वह दिनभर मेरी नज़रो से नज़रे मिलकर चुराकर मुझे ही देखा करती थी यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा हमारे बीच हंसी -मज़ाक आम सी बात हो गयी थी


फिर एक दिन अचानक वह मेरे 

पास आई और बोली मुझे लगता है 

मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ इन 

सब्दों ने मेरे मन - मंदिर में प्यार 

की तरंगे जगा दी थी क्योंकि जो 

बात मैं कहना चाहता था वह उसने 

स्वयं ही कह दिया लेकिन 

मैं उसके 

प्रस्न को सुनकर भी शांत रह गया केवल गम्भीर नज़रों से देखने के आलावा मैं उससे कुछ भी नहीं कह   मेरी खुशियां इतनी प्रबल हो गयी हो कि इन खुशियों ने मेरे मुख से कुछ कहने ही न दिया हो उसने जब मुझे पहली बार छुआ तो यक़ीनन उसके छूने से जो अद्भुत एहसास हुआ उसे मैं कैसे बयां करू आज भी उस हसा को फील करता हूँ तो अच्छा लगता है उसका भोलापन 

 


उसकी मीठी आवाज़ मेरे दिल कि धड़कनो छूकर एक नया साज़ बनाती है एक ऐसा साज़ जिसके हर सुर में सिर्फ ख़ुशी झलकती हो मेरी दीवानगी को भी मेरी आँखों से कोई भी पढ़ सकता थाअद्भुत और अस्चर्य का ऐसा मिलन प्यार का जो हमे जीना सिखाती है , रंगों में देखना , और खुश्बू में  महसूस करना ,सिखाता है कुश ही पलों में जन्मो का साथ निभाने का प्रण शायद कोई दिल का रिश्ता ही करा सकता है


कुछ ऐसे सब्द जो मेरे द्वारा कहे गए उन्हें वो कभी नहीं भूल सकती पर उसके द्वारा हर एक शब्द को मैं कभी नहीं भूलना चाहता उसका प्यार झूठा हो या सच्चा कैसा भी हो मेरे लिए तो वह मेरा पहला प्यार ही कहलायेगा और यही मेरा पहला प्यार जिसकी आँखों में देखते हुए बहुत कुछ कहना चाहता था और बहुत कुछ कह कर भी उसे समझना चाहता था उस से दूर हो जाउंगा यह सोच कर ही मन में हलचल होने लगती है तन - बदन में एक अंजना सा दर्द उठने लगता है जिसे पाने कि सिर्फ मैं कल्पना ही करता रह गया.


वह न जेन कब मुझसे दूर हो गयी मुझे पता ही नहीं चला एक अफ़सोस जीवन भर रहेगा जिस प्यार के एहसास को मैं उसकी आत्मा में बसाना चाहता था उस एहसास को मैं उसके इल में भी नहीं बसा पाया उसके द्वारा कहे आखरी शब्द हम हमेशा दोस्त बनकर रहेंगे लेकिन जो तुम चाहते हो वह सम्भव नहीं।


आज भी अपनी नाम आँखों में बस उसका ही ख्वाब सजाए बौठा हूँ हि  एक दिन वो ज़रूर आयेगी और 
मुझसे कहेगी

        I LOVE YOU........

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