क्या विश्वास किसी से,
क्या दूर क्या पास किसी से,
प्रेम- प्रणय कि अभिलाषा में,
क्या पीड़ा का आभाष किसी से,
दर्द भुलाने की चाहत में,
यादों का बंधन ले बैठे,
जब -जब चाही छाव किसी से,
हम मधुवन से दूर हो गए,
इतने चले अकेले ये पग,
थक कर चकना चूर हो गए,
शीतल छाया कि चाहत में,
हम तो नयी तपन ले बैठे,
दर्द भुलाने कि चाहत में,
यादों का बंधन ले बैठे।

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