फिर तेरा चेहरा नज़र आया मेरे ख्वाबों में,
धुंधला सा , लेकिन अपना सा लगता है,
चुपके से आते हो , चुपके से जाते हो,
कौन हो , क्यों इतना सताते हो,
अपने होंठों पर क्या गुनगुनाते हो,
कानो में राग कोई बरसों का घोल जाते हो,
लम्हा फिर वही सुहाना होता है,
जैसे सदियों से हम मिलते हो,
मेरी पलके जब खुलती है,
तो तू नहीं !
मुस्कुरा कर खुद पर ही हंस लेता हूँ,
ये तो बस एक ख्वाब था
सच में अब ये जाना है,
रूप नया , नक्श नए,
क्या फिर कोई तैयारी है ?
मेरे सपनो में आने की.………।
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