Monday, February 17, 2014

मेरे हिस्से में कुछ भी....



 



मेरे हिस्से में कुछ भी नहीं,



कुछ कोरे पल और तेरी यादों कि रोशनाई है,


हर सुबह - सहर ये सोचता हूँ, 


मेरे साथ तुम थी तो क्या था ? 



अब जब नहीं पास मेरे,




तो खालीपन है साथ मेरे………। 

  

शायद मुक़द्दस होंठ जवाब ही दे दे ...



रोज़ उसे एक ख़त लिखता था,


और जब सारी बातें ,सारी नज़मे कह लेता था,



मैं ख़त में अपनी दोनों आँखें रख देता था,



वो जब पढ़ती थी उस ख़त को, 



मेरी आँखें उस वक़्त सुनती रहती थी,














 कि शायद मुक़द्दस होंठ जवाब ही दे दे !




मैं तो इक मुसाफिर हूँ......





मैं तो इक मुसाफिर हूँ,


बेवजह ही लोगो से रिश्ता बना लेता हूँ,


हर सुब गुज़ारता हूँ तन्हाईओं में,

हर शाम गुज़र जाती है किसी की रुशवाईओं में,

ज़िंदा हूँ ज़िन्दगी तलाश में,


मौत से तो अपनी यारी है .......







Monday, February 10, 2014

ये जो दिल का रिश्ता .............



ज़माने में प्यार सबको नसीब नहीं होता है,
 
अंखिया लड़ जाये जिससे,
 
वही अपना हमदम,
 
वही अपना मीत होता है,
  
   ज़माने में तभी तो सब कहते है,
 
  ये जो दिल का रिश्ता है, 


    बड़ा ही अजीब होता है।

 

तुम मुझको मुझसे ही चुराना चाहते हो....


आँखों -आँखों में मुस्कुराना चाहते हो

बेवजह कोई किस्सा बनाना चाहते हो

इस दिल में बसता है तुम्हारा दर्द देखो 

ये बात और है खुद को खुद से छुपाना चाहते हो 

बनते- बनते बन गए जो ख्वाबों के महल 

उनमे हमराज़ कोई बसना चाहते हो 

साज़ पर उंगलिया रुकी -रुकी सी क्यों है 

वह गीत कौन सा है जो सुनाना चाहते हो

तुम्हारे भीतर कि बेचैनिया कह रही है 


तुम मुझको मुझसे ही चुराना चाहते हो.... 
  

Saturday, February 8, 2014

जहां मेरा नाम...........




मेरी ज़िन्दगी भी मेरी नहीं


ये हज़ार खानो में बंट गयी है।

 
मुझे एक मुट्ठी ज़मीं दो


ये जमीं कितनी सिमट गयी है।


 मुझे पढ़ने वाला पढ़े भी क्या


मुझे लिखने वाला लिखे भी क्या



जहां मेरा नाम 'राज़' लिखा गया 

वही पर स्याही उलट गयी।   



Wednesday, February 5, 2014

आ जाओ लौट कर तुम ....



सदियों सी लम्बी है रातें

सदियों से लम्बे हुए दिन 

आ जाओ लौट कर तुम 

कह रहा है ये दिल 

तुम बिन जिया जाये कैसे

               कैसे जिया जाये तुम बिन............ 





गुलाब खिले गलियारे में 
बरामदे में गूंजती 
तुम्हारी मुश्कान 
किस्मत लिखी हम दोनों की साथ
तभी नाराज़गी के बाद 
बढ़ाता मै दोस्ती का हाथ।  

आइने में एक अक्श उभरा ......


आइने  में एक अक्श उभरा 

और खो गया

हम ख्यालों से अभी उभरे भी 

न थे कि वो नज़दीक से गुज़र गए

उनके पैरों की  जुम्बिश

उनके कदमो की आहट

जाते -जाते पीछे मुड़कर 

देखना उनका

इश्क़ का पैगाम दे गया

लेकिन ये सब कुछ 

यूँ ही नहीं हो गया

ये उस रूप का असर था

जिसे खुदा ने बक्शा था 


और कुदरत ने सजाया था। 

दिल से दूर न जाना .………


दिल   से   दूर   न  जाना,

तुम   हो  मेरी   ज़िन्दगी,

तुम  हो   मेरी  हर  ख़ुशी,

नज़रों से नज़रे मिलाकर,

फिर  न  पलके   झुकाना,

खामोश है क्यों जुबां तेरी,

मुझसे हुई खता क्या ऐसी,


                  ओ मेरी ख़ुशी 
                  ओ मेरी ख़ुशी ………

तेरा आशियाना …......







मेरी ख़ुशी का ठिकाना न था,

एक तरफ तेरा ग़म ,

दूसरी तरफ मयखाना था,
' ख़ुशी ' है मुझसे रूठी,

मुझे मौत के पास जाना था,
एक ख्वाब था कि मै हूँ तेरी बांहों में,

मुझे देख रहा जमाना था,
मैंने सोचा हकीकत है,

वह मेरे ग़मों का फ़साना था,
मैंने तेरी तस्वीर को कहा कि तू है,

लोगों ने कहा कि दीवाना है,
मेरे दर्द बढ़ते गए मै रुक गया,

तूने कहा ये बहाना था,
ठोकर से बिखरा दिया तूने जिसे
गौर से देख वो मेरा दिल नहीं
                          तेरा आशियाना था………

उसे मेरा कर दे ...




है इख्तियार में तेरे 

तू मौज़ा कर दे


वो सख्स मेरा नहीं है

उसे मेरा कर दे 


ये रह गुज़र 

कही ख़तम ही नहीं होती


ज़रा सा दूर तो रास्ता 

मेरा हरा - भरा कर दे

मैं उसके शोर को देखू
                              
 वो मेरा सब्र देखे

 मुझे चिराग बना दे 
 उसे हवा कर दे

 अकेली शाम
 बहुत ही उदास करती है

 किसी को भेज 
 कोई मेरा हम-नवां कर दे


 मै यु ही लम्हों को सोचू

 मेरा भी एक कल कर दे

कोई तो ऐ खुदा मेरा भी कर दे। 
  

तेरे नाम लिखना है..........




तेरे नाम लिखना है

अपनी हर तबाही को 


उम्र भर यूँ ही 


खूने जिगर दिल जलाना है 


सब तरह से कह के देखा 


कुछ असर नहीं होता 


फैसला है जो दिल का 


अब तो वो कर दिखाना है


कैसे तोड़ दे ये दिल 



उनकी यादों से रिश्ता 


और अब तो आखिर 


उनका कोई और ठिकाना है 


हो सके तो ऐ ' राज़ ' छोड़ दो ख्याल उनका ( ख़ुशी ) 


उसे तो तुझे छोड़ किसी और के साथ अपना घर बसना है।  



Sunday, February 2, 2014

तुम्हारा ही जिक्र होता है..



पूछा तो मुझसे भी बहुत जाता है,



राज़ कुछ और कहो,



मै क्या कहु यार,



जो भी कहता हूँ



तुम्हारा ही जिक्र होता है।