है इख्तियार में तेरे
तू मौज़ा कर दे
वो सख्स मेरा नहीं है
उसे मेरा कर दे
ये रह गुज़र
कही ख़तम ही नहीं होती
ज़रा सा दूर तो रास्ता
मेरा हरा - भरा कर दे
मैं उसके शोर को देखू
वो मेरा सब्र देखे
मुझे चिराग बना दे
उसे हवा कर दे
अकेली शाम
बहुत ही उदास करती है
किसी को भेज
कोई मेरा हम-नवां कर दे
मै यु ही लम्हों को सोचू
मेरा भी एक कल कर दे
कोई तो ऐ खुदा मेरा भी कर दे।

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