और खो गया
हम ख्यालों से अभी उभरे भी
न थे कि वो नज़दीक से गुज़र गए
उनके पैरों की जुम्बिश
उनके कदमो की आहट
जाते -जाते पीछे मुड़कर
देखना उनका
इश्क़ का पैगाम दे गया
लेकिन ये सब कुछ
यूँ ही नहीं हो गया
ये उस रूप का असर था
जिसे खुदा ने बक्शा था
और कुदरत ने सजाया था।
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